Friday, November 2, 2018

क्या पॉर्न वेबसाइट पर कस सकता है सरकारी फंदा?

ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब शायद ही कोई खुलकर देना पसंद करे. हो सकता कोई अपनी बोल्डनेस दिखाने के लिए शुरुआती दो सवालों के जवाब दे भी दे लेकिन बहुत संभव है कि तीसरे सवाल के जवाब में वह महज़ अपनी मुस्कान ही आप तक पहुंचाए.

इन सवालों के जवाब भले ही हमें किसी के मुंह से ना सुनाई पड़ें, लेकिन जब कभी भी पॉर्न वेबसाइटों पर बैन लगने की बात निकलती है तो कई चेहरों पर निराशा और परेशानी के भाव अपने आप झलकने लगते हैं.

दरअसल भारत के दूरसंचार विभाग ने देश में इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने वाले तमाम सर्विस प्रोवाइडर्स को आदेश दिया है कि वे 827 पॉर्न वेबसाइटों को ब्लॉक कर दें.

यह आदेश उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के बाद दिया गया जिसमें उन्होंने देश में पॉर्न वेबसाइटों को बंद करने की बात कही थीं.

हाईकोर्ट में बलात्कार के एक मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने कहा था कि उसने पीड़िता का बलात्कार करने से पहले पॉर्न वीडियो देखा था.

दूरसंचार विभाग के इस आदेश के बाद पॉर्नहब सहित कई जानी मानी पॉर्न वेबसाइट भारत में खुलनी बंद भी हो गईं.

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने के साथ अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया.

कितना देखा जाता है पॉर्न?

ऊपर दी गई सोशल मीडिया की टिप्पणियों के ज़रिए आपने अंदाज़ा लगा ही लिया होगा कि पॉर्न वेबसाइटों पर नकेल कसने से इसे इस्तेमाल करने वाले लोग कितना प्रभावित होते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार पॉर्न वेबसाइटों के सच में रोक लगा सकती है. इस सवाल का जवाब पढ़ने से पहले यह भी जान लीजिए कि साल 2015 में भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग 850 पॉर्न वेबसाइटों ब्लॉक कर दिया था.

लेकिन इसके कुछ वक़्त बाद ही तमाम तरह की नई वेबसाइटें हमारे इंटरनेट के मायाजाल में उपलब्ध हो गईं.

दुनियाभर में पॉर्न सामग्री उपलब्ध करवाने वाली जानी मानी वेबसाइट पॉर्नहब के एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि साल 2017 में भारत में पॉर्न वीडियो देखने में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

इसकी सबसे बड़ी वजह मोबाइल डेटा का बहुत ज़्यादा सस्ता होना बताया गया था. दुनियाभर में तुलना करें तो भारत पॉर्न देखने के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है. साल 2014 तक भारत पांचवे पायदान पर था.