在北京城中一个小小的院子里,家人和朋友聚在一起纪念赵紫阳。30年前的,中国当局派出坦克出入天安门广场镇压要求民主的中国学生,他是中国最高领导层中极力反对一个。
后来,中共党内定性,认为他在那一天犯了“严重错误”,其名字也从官方历史当中删去。
悼念者和记者要辗转穿过迂回的胡同,才能来到北京城里赵紫阳的老四合院式住宅,途中警察和便衣保安数步一哨,随时准备盘查来访者。
这是一个寒冷的一月天,也是2005年因中风逝世的赵紫阳的忌日。多辆警车在每一个路口驻守。住宅门外则停着一辆没有车牌号的国安车辆,车上的人监视着到来的人和车,不时还在对步话机说着什么。
中国共产党在近30年时间里一直试图将1989年6月4日发生的事件从历史当中抹去,而这里的年轻人对于那一天发生的事情知之甚少。赵紫阳的处境也印证了当局仍然在这样做。他是当时中共党内排行最高的官员,但是在关于那场重大事件的历史记录中,已经没了他的名字。即使他已经不在人世,却仍然被看作是一个威胁。
他的家人说,前来悼念的人数每年都在减少。有些人是被挡在外面,不允许进入。还有一些人则是人身自由受到限制——就像赵紫阳本人在16年以来受到的待遇一样。
“这么多年都是这样,我们还能怎样?”赵紫阳的儿子赵二军对于这些干预已经司空见惯。
“有时候我们出去,帮着带人进来。这个人以前是我父亲的秘书——他和外面的警察吵起来了。就是他也差点不让进。”
我们屋里说吧,”赵二军指了指院子旁边的高楼说,“那里有人脸识别摄像头,来的人脸和身份都会录下来。你这次进来了,下一次可能就难一些了。”
一小拨人走进了赵紫阳的书屋,里面陈列着他的照片、文档和一些物品,还有他已经过世的夫人。这里呈现的是一个充满爱的家,一个为他的成就感到自豪的家——他曾是中国的总理、中共中央总书记。在被排挤下台之前,他也曾经被看作是推动中国重大经济改革的功勋人物。
书房里已经放满了焚香和鲜花,更多的鲜花被放在了门外。
很多来访者都告诉我们,他们是来自赵紫阳的老家。这未必全部是事实,但是似乎这样说会比较容易通过警卫的一关。而他们来这里,不仅是想保存关于赵紫阳的记忆,还有他的信念。
张保林(音)过去担任记者。他报道了赵紫阳给中国很多地方带来财富但同时也被指引来腐败的年代。在那之后,赵紫阳挑战了他的政党,在天安门的抗议当中维护学生。
张保林说:“赵紫阳在改革开放当中扮演了非常重要的角色,他任内带来了很大的进步。所以我觉得,对于像赵紫阳这样一个去世多年的老人,我们应该纪念。在改革开放纪念当中没有(他的名字),我们认为是非常不公平的。”
Friday, January 25, 2019
Thursday, January 24, 2019
वेनेज़ुएला के उस जेल की कहानी, जहां यातना की पराकाष्ठता रूह कंपाने वाली है
वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस के केंद्र में आधुनिकता का प्रतीक मानी जाने वाली कई इमारतें दिखती हैं जो आसपास की झुग्गी-झोपड़ी के बीच सिर उठाए खड़ी हैं.
एल हेलिकॉएड कभी यहां की आर्थिक समृद्धि और विकास का प्रतीक हुआ करता था.
आज इस इमारत में देश की सबसे भयावह जेल है जो अब लातिन अमरीकी शक्ति के केंद्र रहे इस देश के मौजूदा संकट की मूक गवाह भी है.
आधुनिकता का प्रतीक
इस इमारत को 1950 के दशक में बनाया गया था जब देश के पास तेल से आने वाली अथाह संपत्ति थी.
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था उछाल पर थी और तानाशाह मार्कोस पेरेज़ जिमेनेज़ वेनेज़ुएला को आधुनिकता की मिसाल बनाना चाहते थे.
"डाउनवार्ड स्पाइरल: एल हेलिकॉएड्स डिसेन्ट फ्रॉम मॉल टू प्रिज़न" की सह-लेखिका और यूके के एसैक्स विश्वविद्यालय में लैटिन अमरीकन स्टडीज़ की निदेशक डॉ. लीज़ा ब्लैकमोर कहती हैं, "आधुनिकता के इस सपने में वाकई में काफ़ी पैसा लगाया गया था."
1948 में इस देश में सैन्य शासन लग गया था और इस तरह की धारणा बन गई कि "निर्माण के साथ ही हम विकास की राह में आगे बढ़ सकते हैं."
इस इमारत को देश के सबसे बड़े व्यवसायिक केंद्र के रूप में बनाया जा रहा था, जहां इस इमारत में 300 से अधिक दुकानों की जगह थी और 04 किलोमीटर का रैंप मौजूद था ताकि लोग अपनी कार से ऊपर तक जा सकें.
ये इमारत इतनी बड़ी थी कि कराकस शहर के किसी भी कोने से इसे देखा जा सकता था.
डॉ. ब्लैकमोर कहती हैं, "ये अपने आप में वास्तुकला का शानदार नमूना था. पूरे लातिन अमरीका में इस तरह की कोई दूसरी इमारत नहीं थी."
इमारत को गुंबद का आकार दिया गया था और इसमें अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होटल, थिएटर और दफ्तरों की कल्पना की गई थी. साथ ही हेलिकॉपटर उतारने के लिए हैलिपैड और विएना में बने ख़ास लिफ्ट लगाए जाने थे.
सालों तक ये इमारत सूनी पड़ी रही. इसमें जान फूंकने के लिए कई छोटी-बड़ी योजनाएं भी लाई गईं लेकिन अपने उद्देश्य में वो नाकाम रहीं.
1980 के दशक में सरकार ने फ़ैसला किया कि वो ख़ाली पड़े इस एल हेलिकॉएड में कुछ सरकारी दफ्तर खोलेगी. इन दफ्तरों में एक बोलिवारियन इंटेलिजेंस सर्विस भी थी, जिसे सेबिन के नाम से जाना जाता है.
इसके बाद से इस जगह को यातना और डर के प्रतीक के रुप में देखा जाता है. इस जगह में साधारण क़ैदियों के साथ-साथ राजनीतिक क़ैदियों को भी रखा जाता है.
एल हेलिकॉएड में जीवन कैसा था इसकी तस्वीर जानने के लिए बीबीसी ने यहां वक़्त बिता चुके पूर्व क़ैदियों, उनके परिवारों, उनके क़ानूनी सलाहकारों और ग़ैर-सरकारी संगठनों से बात की. बीबीसी ने दो ऐसे लोगों से भी बात की जो पहले जेल के पहरेदार के रूप में काम कर चुके थे.
अपने और अपने परिवारों के ख़िलाफ़ सरकारी कार्रवाई के डर के कारण उन्होंने बीबीसी से अपनी पहचान ना उजागर करने की गुज़ारिश की.
मई 2014 में रोस्मित मन्टिला एल हेलिकॉएड में लाए गए थे. देश में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में जिन 3000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था उनमें से एक मन्टिला भी थे.
32 साल के मन्टिला राजनीतिक कार्यकर्ता तो थे ही साथ में एलजीबीटी अधिकारों के बारे में भी मुखर थे.
उनकी क़ैद के दौरान उन्हें वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय असेंबली के लिए चुना गया था और इसके लिए चुने जाने वाले देश के पहले समलैंगिक नेता थे.
वेनेज़ुएला में धीरे-धीरे महंगाई बढ़ने लगी और इसके साथ ही खाने के सामान और दवाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव होने लगा. देश की सार्वजनिक सेवाएं भी चरमराने लगीं, जिस कारण आम लोगों के लिए यहां बसर करना मुश्किल होता गया.
एल हेलिकॉएड के लिए ये दौर अव्यवस्था का दौर था. बसों में भर भर कर रोज़ाना सैंकड़ों क़ैदी यहां लाए जाते थे.
इन क़ैदियों में छात्र, राजनीतिक कार्यकर्ता और आम लोग भी शामिल थे, जो सिर्फ़ इसलिए गिरफ़्तार कर लिए गए क्योंकि वो ग़लत समय पर ग़लत जगह पर मौजूद थे.
मन्टिला पर आरोप है कि वो सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए धन जुटाते थे. वो इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
एल हेलिकॉएड कभी यहां की आर्थिक समृद्धि और विकास का प्रतीक हुआ करता था.
आज इस इमारत में देश की सबसे भयावह जेल है जो अब लातिन अमरीकी शक्ति के केंद्र रहे इस देश के मौजूदा संकट की मूक गवाह भी है.
आधुनिकता का प्रतीक
इस इमारत को 1950 के दशक में बनाया गया था जब देश के पास तेल से आने वाली अथाह संपत्ति थी.
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था उछाल पर थी और तानाशाह मार्कोस पेरेज़ जिमेनेज़ वेनेज़ुएला को आधुनिकता की मिसाल बनाना चाहते थे.
"डाउनवार्ड स्पाइरल: एल हेलिकॉएड्स डिसेन्ट फ्रॉम मॉल टू प्रिज़न" की सह-लेखिका और यूके के एसैक्स विश्वविद्यालय में लैटिन अमरीकन स्टडीज़ की निदेशक डॉ. लीज़ा ब्लैकमोर कहती हैं, "आधुनिकता के इस सपने में वाकई में काफ़ी पैसा लगाया गया था."
1948 में इस देश में सैन्य शासन लग गया था और इस तरह की धारणा बन गई कि "निर्माण के साथ ही हम विकास की राह में आगे बढ़ सकते हैं."
इस इमारत को देश के सबसे बड़े व्यवसायिक केंद्र के रूप में बनाया जा रहा था, जहां इस इमारत में 300 से अधिक दुकानों की जगह थी और 04 किलोमीटर का रैंप मौजूद था ताकि लोग अपनी कार से ऊपर तक जा सकें.
ये इमारत इतनी बड़ी थी कि कराकस शहर के किसी भी कोने से इसे देखा जा सकता था.
डॉ. ब्लैकमोर कहती हैं, "ये अपने आप में वास्तुकला का शानदार नमूना था. पूरे लातिन अमरीका में इस तरह की कोई दूसरी इमारत नहीं थी."
इमारत को गुंबद का आकार दिया गया था और इसमें अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होटल, थिएटर और दफ्तरों की कल्पना की गई थी. साथ ही हेलिकॉपटर उतारने के लिए हैलिपैड और विएना में बने ख़ास लिफ्ट लगाए जाने थे.
सालों तक ये इमारत सूनी पड़ी रही. इसमें जान फूंकने के लिए कई छोटी-बड़ी योजनाएं भी लाई गईं लेकिन अपने उद्देश्य में वो नाकाम रहीं.
1980 के दशक में सरकार ने फ़ैसला किया कि वो ख़ाली पड़े इस एल हेलिकॉएड में कुछ सरकारी दफ्तर खोलेगी. इन दफ्तरों में एक बोलिवारियन इंटेलिजेंस सर्विस भी थी, जिसे सेबिन के नाम से जाना जाता है.
इसके बाद से इस जगह को यातना और डर के प्रतीक के रुप में देखा जाता है. इस जगह में साधारण क़ैदियों के साथ-साथ राजनीतिक क़ैदियों को भी रखा जाता है.
एल हेलिकॉएड में जीवन कैसा था इसकी तस्वीर जानने के लिए बीबीसी ने यहां वक़्त बिता चुके पूर्व क़ैदियों, उनके परिवारों, उनके क़ानूनी सलाहकारों और ग़ैर-सरकारी संगठनों से बात की. बीबीसी ने दो ऐसे लोगों से भी बात की जो पहले जेल के पहरेदार के रूप में काम कर चुके थे.
अपने और अपने परिवारों के ख़िलाफ़ सरकारी कार्रवाई के डर के कारण उन्होंने बीबीसी से अपनी पहचान ना उजागर करने की गुज़ारिश की.
मई 2014 में रोस्मित मन्टिला एल हेलिकॉएड में लाए गए थे. देश में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में जिन 3000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था उनमें से एक मन्टिला भी थे.
32 साल के मन्टिला राजनीतिक कार्यकर्ता तो थे ही साथ में एलजीबीटी अधिकारों के बारे में भी मुखर थे.
उनकी क़ैद के दौरान उन्हें वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय असेंबली के लिए चुना गया था और इसके लिए चुने जाने वाले देश के पहले समलैंगिक नेता थे.
वेनेज़ुएला में धीरे-धीरे महंगाई बढ़ने लगी और इसके साथ ही खाने के सामान और दवाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव होने लगा. देश की सार्वजनिक सेवाएं भी चरमराने लगीं, जिस कारण आम लोगों के लिए यहां बसर करना मुश्किल होता गया.
एल हेलिकॉएड के लिए ये दौर अव्यवस्था का दौर था. बसों में भर भर कर रोज़ाना सैंकड़ों क़ैदी यहां लाए जाते थे.
इन क़ैदियों में छात्र, राजनीतिक कार्यकर्ता और आम लोग भी शामिल थे, जो सिर्फ़ इसलिए गिरफ़्तार कर लिए गए क्योंकि वो ग़लत समय पर ग़लत जगह पर मौजूद थे.
मन्टिला पर आरोप है कि वो सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए धन जुटाते थे. वो इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
Thursday, January 17, 2019
最高检要求保护民营经济权益:切实防止不该诉的诉了
中新社北京1月17日电 (记者 张蔚然)中国最高人民检察院检察长张军17日在北京表示,当前经济下行压力大,企业发展不易,要依法平等保护民营经济合法权益,办案时更要注意方式方法,切实防止不该捕的捕了、不该诉的诉了。
全国检察长会议当天召开,张军在会上回顾2018年全国检察机关工作,对2019年工作作出部署,期间强调依法平等保护民营经济合法权益。
张军指出,保护民营经济合法权益,关键在“平等”二字,公有制与非公有制经济一视同仁、平等保护,坚决杜绝差异性、选择性司法。要加强产权司法保护,健全涉企错案甄别纠正常态化机制,推动形成明晰、稳定、可预期的产权保护制度体系。当前经济下行压力大,企业发展不易。办案时更要注意方式方法,要认真审视是不是必须依法采取逮捕的强制措施,是不是必须依法提起公诉。切实防止不该捕的捕了、不该诉的诉了。
2018年,针对依法平等保护民营经济合法权益抓落实不够的问题,检察机关曾专门到全国工商联调研,召开服务民营经济座谈会,了解民营企业家深层司法需求。从2016年以来制定的3个文件中归纳出11条,要求全国检察机关更具针对性地把握司法政策。
关于如何进一步保护民营经济合法权益,张军透露高检院即将下发典型案例,要求各地认真学习、加以总结、指导好办案。同时要坚持实事求是,坚持法治思维,决不能误读中央有关司法政策,搞“一风吹”
参加企业。经国家药品监督管理部门批准、在中国大陆地区上市的集中采购范围内药品的生产企业(进口药品全国总代理视为生产企业),均可参加。
药品范围。从通过一致性评价的仿制药对应的通用名药品中遴选试点品种。
入围标准。包括质量入围标准和供应入围标准。质量入围标准主要考虑药品临床疗效、不良反应、批次稳定性等,原则上以通过一致性评价为依据。供应入围标准主要考虑企业的生产能力、供应稳定性等,能够确保供应试点地区采购量的企业可以入围。入围标准的具体指标由联合采购办公室负责拟定。
集中采购形式。根据每种药品入围的生产企业数量分别采取相应的集中采购方式:入围生产企业在3家及以上的,采取招标采购的方式;入围生产企业为2家的,采取议价采购的方式;入围生产企业只有1家的,采取谈判采购的方式。
《方案》提出,在试点地区公立医疗机构报送的采购量基础上,按照试点地区所有公立医疗机构年度药品总用量的60%—70%估算采购总量,进行带量采购,量价挂钩、以量换价,形成药品集中采购价格,试点城市公立医疗机构或其代表根据上述采购价格与生产企业签订带量购销合同。剩余用量,各公立医疗机构仍可采购省级药品集中采购的其他价格适宜的挂网品种。
全国检察长会议当天召开,张军在会上回顾2018年全国检察机关工作,对2019年工作作出部署,期间强调依法平等保护民营经济合法权益。
张军指出,保护民营经济合法权益,关键在“平等”二字,公有制与非公有制经济一视同仁、平等保护,坚决杜绝差异性、选择性司法。要加强产权司法保护,健全涉企错案甄别纠正常态化机制,推动形成明晰、稳定、可预期的产权保护制度体系。当前经济下行压力大,企业发展不易。办案时更要注意方式方法,要认真审视是不是必须依法采取逮捕的强制措施,是不是必须依法提起公诉。切实防止不该捕的捕了、不该诉的诉了。
2018年,针对依法平等保护民营经济合法权益抓落实不够的问题,检察机关曾专门到全国工商联调研,召开服务民营经济座谈会,了解民营企业家深层司法需求。从2016年以来制定的3个文件中归纳出11条,要求全国检察机关更具针对性地把握司法政策。
关于如何进一步保护民营经济合法权益,张军透露高检院即将下发典型案例,要求各地认真学习、加以总结、指导好办案。同时要坚持实事求是,坚持法治思维,决不能误读中央有关司法政策,搞“一风吹”
参加企业。经国家药品监督管理部门批准、在中国大陆地区上市的集中采购范围内药品的生产企业(进口药品全国总代理视为生产企业),均可参加。
药品范围。从通过一致性评价的仿制药对应的通用名药品中遴选试点品种。
入围标准。包括质量入围标准和供应入围标准。质量入围标准主要考虑药品临床疗效、不良反应、批次稳定性等,原则上以通过一致性评价为依据。供应入围标准主要考虑企业的生产能力、供应稳定性等,能够确保供应试点地区采购量的企业可以入围。入围标准的具体指标由联合采购办公室负责拟定。
集中采购形式。根据每种药品入围的生产企业数量分别采取相应的集中采购方式:入围生产企业在3家及以上的,采取招标采购的方式;入围生产企业为2家的,采取议价采购的方式;入围生产企业只有1家的,采取谈判采购的方式。
《方案》提出,在试点地区公立医疗机构报送的采购量基础上,按照试点地区所有公立医疗机构年度药品总用量的60%—70%估算采购总量,进行带量采购,量价挂钩、以量换价,形成药品集中采购价格,试点城市公立医疗机构或其代表根据上述采购价格与生产企业签订带量购销合同。剩余用量,各公立医疗机构仍可采购省级药品集中采购的其他价格适宜的挂网品种。
Tuesday, January 8, 2019
सऊदी अरब, जहां पिता की बात ना मानने पर बेटी जा सकती है जेल
बीते साल सऊदी अरब ने महिलाओं के कार चलाने को लेकर लगी पाबंदी हटा ली थी. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब की काफ़ी सराहना हुई.
हालांकि इसके साथ वहां महिलाओं पर लगी पाबंदी ख़त्म नहीं हुई है, ख़ास कर वहां महिलाओं पर 'मेल गार्डियनशिप सिस्टम' यानी 'पुरुष अभिभावक व्यवस्था' लागू है. इसके अनुसार किसी महिला के लिए बड़े फ़ैसले लेने का अधिकार केवल उसके पिता, भाई, पति या बेटे के पास ही होता है.
इसी साल जनवरी में महिलाओं पर लगी इन पाबंदियों की बात तब सामने आई थी जब अपने परिवार को छोड़ कर भागी एक सऊदी महिला ने ख़ुद को थाईलैंड के बैंकॉक में एक होटल के कमरे में ही बंद कर लिया.
18 वर्षीय रहाफ़ मोहम्मद अल-क़ुनून का कहना है कि अगर उन्हें वापस भेजा गया तो हो सकता है कि उनके घरवाले उनकी हत्या कर दें.
सऊदी अरब में महिला को पासपोर्ट बनवाने, देश के बाहर जाने, विदेश में पढ़ने या फिर सरकार से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने, शादी करने, जेल से छूटने, यौन हिंसा पीड़ितों के लिए बने आसरा गृह छोड़ने तक के लिए अपने पुरुष रिश्तेदार की मदद लेनी पड़ती है.
मिस्र-अमरीकी मूल की पत्रकार मोना एल्तहावी कहती हैं, "ये व्यवस्था जन्म से लेकर मौत तक महिला की ज़िंदगी के रास्ते तय करती है. ताउम्र उनके साथ नाबालिग़ों जैसा व्यवहार किया जाता है."
सऊदी अरब ने साल 2000 में महिलाओं के ख़िलाफ़ सभी तरह के भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र के कन्वेन्शन को मंज़री दे दी थी और कहा था कि वो शरिया क़ानून या इस्लामी क़ानून के अनुसार देश में महिलाओं की समानता का अधिकार दिया गया है.
सबसे बड़ी रुकावट
इस रूढ़िवादी खाड़ी देश में पब्लिक स्कूलों में महिलाओं और लड़कियों के खेलने पर और स्टेडियम में उनके फ़ुटबॉल मैच देखने जाने पर लगी पाबंदी को भी ख़त्म कर दिया गया था.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने फ़रवरी 2018 में चिंता जताई थी कि सऊदी अरब महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव ख़त्म करने के लिए ख़ास क़ानून नहीं अपना रहा है और उसने महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले भेदभाव को क़ानूनी तौर पर परिभाषित भी नहीं किया है.
जानकारों का कहना था कि समाज और अर्थव्यवस्था में महिलाओं की कम भागीदारी में सबसे बड़ी रुकावट पुरुष प्रधान व्यवस्था ही है.
माना जाता है कि ये व्यवस्था क़ुरान के एक छंद पर आधारित है जो सऊदी धार्मिक व्यवस्था का भी आधार है. इस छंद के अनुसार, "महिलाओं के रक्षक और उनका पोषण करने वाले पुरुष हैं क्योंकि ईश्वर ने एक को अधिक ताक़त दी है और साथ ही उन्हें पालने के साधन भी अधिक दिए हैं."
साल 2016 में आई ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, "कई जगहों पर सऊदी अरब पुरुष प्रधान व्यवस्था लागू करता है." रिपोर्ट में कहा गया था कि इस व्यवस्था पर सवाल करने वाली महिलाओं को या तो जेल भेज दिया जाता है या फिर उन्हें सज़ा दी जाती है.
साल 2008 में एक जानी-मानी महिलाधिकार कार्यकर्ता समर बदावी अपने परिवार को छोड़ कर आसरा गृह में चली गईं थीं. उन्होंने अपने पिता पर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था. इसके बाद समर ने पुरुष अभिभावक व्यवस्था के तहत अपने पिता को मिले अधिकार ख़त्म करने के लिए क़ानूनी जंग लड़ने का फ़ैसला किया.
इसके जवाब में उनके पिता ने उन पर 'पिता की आज्ञा न मानने' का आरोप लगाया. उन्हें अदालत ने 2010 में जेल भेजने की सज़ा सुनाई. इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता उनके मामले को दुनिया के सामने ले कर आए जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप ख़ारिज किए गए.
हालांकि इसके साथ वहां महिलाओं पर लगी पाबंदी ख़त्म नहीं हुई है, ख़ास कर वहां महिलाओं पर 'मेल गार्डियनशिप सिस्टम' यानी 'पुरुष अभिभावक व्यवस्था' लागू है. इसके अनुसार किसी महिला के लिए बड़े फ़ैसले लेने का अधिकार केवल उसके पिता, भाई, पति या बेटे के पास ही होता है.
इसी साल जनवरी में महिलाओं पर लगी इन पाबंदियों की बात तब सामने आई थी जब अपने परिवार को छोड़ कर भागी एक सऊदी महिला ने ख़ुद को थाईलैंड के बैंकॉक में एक होटल के कमरे में ही बंद कर लिया.
18 वर्षीय रहाफ़ मोहम्मद अल-क़ुनून का कहना है कि अगर उन्हें वापस भेजा गया तो हो सकता है कि उनके घरवाले उनकी हत्या कर दें.
सऊदी अरब में महिला को पासपोर्ट बनवाने, देश के बाहर जाने, विदेश में पढ़ने या फिर सरकार से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने, शादी करने, जेल से छूटने, यौन हिंसा पीड़ितों के लिए बने आसरा गृह छोड़ने तक के लिए अपने पुरुष रिश्तेदार की मदद लेनी पड़ती है.
मिस्र-अमरीकी मूल की पत्रकार मोना एल्तहावी कहती हैं, "ये व्यवस्था जन्म से लेकर मौत तक महिला की ज़िंदगी के रास्ते तय करती है. ताउम्र उनके साथ नाबालिग़ों जैसा व्यवहार किया जाता है."
सऊदी अरब ने साल 2000 में महिलाओं के ख़िलाफ़ सभी तरह के भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र के कन्वेन्शन को मंज़री दे दी थी और कहा था कि वो शरिया क़ानून या इस्लामी क़ानून के अनुसार देश में महिलाओं की समानता का अधिकार दिया गया है.
सबसे बड़ी रुकावट
इस रूढ़िवादी खाड़ी देश में पब्लिक स्कूलों में महिलाओं और लड़कियों के खेलने पर और स्टेडियम में उनके फ़ुटबॉल मैच देखने जाने पर लगी पाबंदी को भी ख़त्म कर दिया गया था.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने फ़रवरी 2018 में चिंता जताई थी कि सऊदी अरब महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव ख़त्म करने के लिए ख़ास क़ानून नहीं अपना रहा है और उसने महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले भेदभाव को क़ानूनी तौर पर परिभाषित भी नहीं किया है.
जानकारों का कहना था कि समाज और अर्थव्यवस्था में महिलाओं की कम भागीदारी में सबसे बड़ी रुकावट पुरुष प्रधान व्यवस्था ही है.
माना जाता है कि ये व्यवस्था क़ुरान के एक छंद पर आधारित है जो सऊदी धार्मिक व्यवस्था का भी आधार है. इस छंद के अनुसार, "महिलाओं के रक्षक और उनका पोषण करने वाले पुरुष हैं क्योंकि ईश्वर ने एक को अधिक ताक़त दी है और साथ ही उन्हें पालने के साधन भी अधिक दिए हैं."
साल 2016 में आई ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, "कई जगहों पर सऊदी अरब पुरुष प्रधान व्यवस्था लागू करता है." रिपोर्ट में कहा गया था कि इस व्यवस्था पर सवाल करने वाली महिलाओं को या तो जेल भेज दिया जाता है या फिर उन्हें सज़ा दी जाती है.
साल 2008 में एक जानी-मानी महिलाधिकार कार्यकर्ता समर बदावी अपने परिवार को छोड़ कर आसरा गृह में चली गईं थीं. उन्होंने अपने पिता पर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था. इसके बाद समर ने पुरुष अभिभावक व्यवस्था के तहत अपने पिता को मिले अधिकार ख़त्म करने के लिए क़ानूनी जंग लड़ने का फ़ैसला किया.
इसके जवाब में उनके पिता ने उन पर 'पिता की आज्ञा न मानने' का आरोप लगाया. उन्हें अदालत ने 2010 में जेल भेजने की सज़ा सुनाई. इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता उनके मामले को दुनिया के सामने ले कर आए जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप ख़ारिज किए गए.
Tuesday, January 1, 2019
杜特尔特再引争议:“我曾伸手进女佣的内裤”
他日前发表演说期间,主动透露自己中学时期向神父告解时,告诉对方自己趁家佣睡觉时,掀起她的被子,伸手进她的内裤触摸。杜特尔特说家佣之后起床,“于是我离开她的房间”。菲律宾普勒新闻网站(Rappler)引述杜特尔特说,那名神父当时回应说,杜特尔特“会进地狱”。
总统办公室随即尝试替他解释,指杜特尔特在演说期间“编了个故事”,内容也是“加了许多色彩”。但他的言论始终引起当起民间组织的不满,批评他不配当菲律宾总统,应该辞职。
杜特尔特2016年就任菲律宾总统后,严厉打击与毒品和贪污有关的罪行,但引来包括当地天主教教会批评,指政府纵容执法部门滥权、侵犯人权。
杜特尔特演说的内容原本是批评天主教教会本身也爆出许多神职人员性侵犯儿童的丑闻,其身不正,因此“没资格”批评他的政策。
菲律宾女权组织加布丽埃拉(Gabriela)的发言人指,杜特尔特的言论相等于承认强暴。防止贩卖女性组织(Coalition Against Trafficking in Women)亚太分部主席昂里凯(Jean Enriquez)也批评,杜特尔特这种吹嘘性侵犯的言论“会助长强暴文化”。
特朗普、杜特尔特和科尔宾:席卷全球的“民粹主义”有何共通点
菲律宾总统称“不放弃南海仲裁裁决”
普京“双套车”、习近平修宪和杜特尔特跟进
狂言不断 “杜大炮”凭什么吸引粉丝?
他就任总统后的言论没有收敛。他今年6月到访韩国时,向在当地做工菲律宾人演说,期间在演讲台上亲吻一名女观众,引来批评。他2月向一些当地前亲共民兵发表演讲时,又声言要向“亲共女民兵的下体开火”。
但这些惹火言论没有影响杜特尔特的支持度。普勒新闻网站引述当地最新民意调查显示,2018年第四季有74%的受访菲律宾人满意杜特尔特的表现,比第三季增加4%。
总统办公室随即尝试替他解释,指杜特尔特在演说期间“编了个故事”,内容也是“加了许多色彩”。但他的言论始终引起当起民间组织的不满,批评他不配当菲律宾总统,应该辞职。
杜特尔特2016年就任菲律宾总统后,严厉打击与毒品和贪污有关的罪行,但引来包括当地天主教教会批评,指政府纵容执法部门滥权、侵犯人权。
杜特尔特演说的内容原本是批评天主教教会本身也爆出许多神职人员性侵犯儿童的丑闻,其身不正,因此“没资格”批评他的政策。
菲律宾女权组织加布丽埃拉(Gabriela)的发言人指,杜特尔特的言论相等于承认强暴。防止贩卖女性组织(Coalition Against Trafficking in Women)亚太分部主席昂里凯(Jean Enriquez)也批评,杜特尔特这种吹嘘性侵犯的言论“会助长强暴文化”。
特朗普、杜特尔特和科尔宾:席卷全球的“民粹主义”有何共通点
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他就任总统后的言论没有收敛。他今年6月到访韩国时,向在当地做工菲律宾人演说,期间在演讲台上亲吻一名女观众,引来批评。他2月向一些当地前亲共民兵发表演讲时,又声言要向“亲共女民兵的下体开火”。
但这些惹火言论没有影响杜特尔特的支持度。普勒新闻网站引述当地最新民意调查显示,2018年第四季有74%的受访菲律宾人满意杜特尔特的表现,比第三季增加4%。
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