Thursday, December 13, 2018

रफ़ाल विमान में ऐसा क्या ख़ास है?

फ़्रांस से 36 रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदने का समझौता काफ़ी विवादित हो गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को साफ़ कर दिया है कि इस मामले की कोई जांच नहीं होगी.

विवाद और राजनीति से अलग एक सवाल बार-बार सामने आता रहा है कि ये विमान इतना ख़ास क्यों है और क्यों भारत सरकार इसे ख़रीदने को लेकर इतनी उत्साहित रही है.

भारतीय वायु सेना के उपप्रमुख एसबी देव ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था कि रफ़ाल एक बेहतरीन लड़ाकू विमान है और इसकी क्षमता अभूतपूर्व है.

रफ़ाल क्या कर पाएगा?
क्या रफ़ाल वाक़ई बेहतरीन लड़ाकू विमान है? क्या इसके आने से भारतीय सेना की ताक़त बढ़ेगी? क्या चीन और पाकिस्तान से युद्ध के हालात में रफ़ाल कारगर साबित होगा?

द इंस्टीट्यूट फ़ॉर डिफेंस स्टडीज़ एंड एनालिसिस (IDSA) में फ़ाइटर जेट पर विशेषज्ञता रखने वाले एक विश्लेषक का कहना है, ''कोई भी लड़ाकू विमान कितना ताक़तवर है यह उसकी सेंसर क्षमता और हथियार पर निर्भर करता है. मतलब कोई फ़ाइटर प्लेन कितनी दूरी से देख सकता है और कितनी दूर तक मार कर सकता है.''

''ज़ाहिर है इस मामले में रफ़ाल बहुत आधुनिक लड़ाकू विमान है. भारत ने इससे पहले 1997-98 में रूस से सुखोई ख़रीदा था. सुखोई के बाद रफ़ाल ख़रीदा जा रहा है. 20-21 साल के बाद यह डील हो रही है तो ज़ाहिर है इतने सालों में टेक्नॉलजी बदली है.''

वो कहते हैं, ''कोई फ़ाइटर प्लेन कितनी ऊंचाई तक जाता है यह उसकी इंजन की ताक़त पर निर्भर करता है. सामान्य रूप से फ़ाइटर प्लेन 40 से 50 हज़ार फ़िट की ऊंचाई तक जाते ही हैं, लेकिन हम ऊंचाई से किसी लड़ाकू विमान की ताक़त का अंदाज़ा नहीं लगा सकते हैं. फ़ाइटर प्लेन की ताक़त मापने की कसौटी हथियार और सेंसर क्षमता ही है.''

एशिया टाइम्स में रक्षा और विदेश नीति के विश्लेषक इमैनुएल स्कीमिया ने नेशनल इंटरेस्ट में लिखा है, ''परमाणु हथियारों से लैस रफ़ाल हवा से हवा में 150 किलोमीटर तक मिसाइल दाग सकता है और हवा से ज़मीन तक इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है. कुछ भारतीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि रफ़ाल की क्षमता पाकिस्तान की एफ़-16 से ज़्यादा है.''

क्या भारत इसके दम पर जंग जीत पाएगा?
क्या भारत पाकिस्तान से इस लड़ाकू विमान के ज़रिए युद्ध जीत सकता है? IDSA से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है, ''पाकिस्तान के पास जो फ़ाइटर प्लेन हैं वो किसी से छुपे नहीं हैं. उनके पास जे-17, एफ़-16 और मिराज हैं. ज़ाहिर है कि रफ़ाल की तरह इनकी टेक्नॉलजी एडवांस नहीं है. पर हमें यह समझना चाहिए कि अगर भारत के पास 36 रफ़ाल हैं तो वो 36 जगह ही लड़ाई कर सकते हैं. अगर पाकिस्तान के पास इससे ज़्यादा फाइटर प्लेन होंगे तो वो ज़्यादा जगहों से लड़ाई करेगा. मतलब संख्या मायने रखती है.''

पूर्व रक्षा मंत्री और वर्तमान में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी रफ़ाल समझौते को आगे बढ़ाने में शामिल रहे हैं. पर्रिकर ने एक बार कहा था कि रफ़ाल के आने से भारत, पाकिस्तान की हवाई क्षमता पर भारी पड़ेगा.

पर्रिकर ने गोवा कला और साहित्य उत्सव में कहा था, ''इसका टारगेट अचूक होगा. रफ़ाल ऊपर-नीचे, अगल-बगल यानी हर तरफ़ निगरानी रखने में सक्षम है. मतलब इसकी विजिबिलिटी 360 डिग्री होगी. पायलट को बस विरोधी को देखना है और बटन दबा देना है और बाक़ी काम कंप्यूटर कर लेगा. इसमें पायलट के लिए एक हेलमेट भी होगा.''

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